हमारे वैज्ञानिकों को पृत्वी के पास ही एक ऐसा ग्रह मिल गया है, जिसपर पानी मिला है। हमारे वैज्ञानिक उत्साहित हैं क्योंकि वहंा पर वह जीवन की संभावनाएं तलाश सकते हैं। वह देखना चाहते हैं कि परग्रही आखिर किस प्रकार के दिखते होंगे। यदि वास्तव में वहां पर परग्रही मिलते हैं तो हम भी उन्हें देखना चाहेंगे।
परन्तु जब भी ऐसी कोई खबर आती है तो मुझे पृथ्वी पर ही रहने वाले ऐसे मानवों के बारे में ख्याल आ जाता है जो यदि हमारे सामने अचानक आ जाऐं तो हम चौंक जाएं। शायद हम उन्हें एलियन ही मान लें। सोमालिया में शायद ऐसे लोग हैं। भूख ने उनकी हड्डी पर से मांस की आखिरी परत भी सोख ली है। इन्टरनेट पर ऐसी कितनी तस्वीरें मिल जाएंगी, जिन्हें देख कर कलेजा चाक-चाक हो जाता है। कल्पना करता हूं उन मांओं की आंखों और आत्मा में छिपे दर्द की जो कि अपने उस बच्चे को तिल-तिल मरते देखती होगी, जो पैदा होने के बाद शायद ही कभी हंसा हो। मैं नहीं कहता कि हमारे वैज्ञानिक कुछ गलत काम कर रहे हैं, परन्तु एलियन को देखने की भूख लिए इन वैज्ञानिकों और विश्व के सत्ताधीशों को यदि इन भूखे कंकालों के सामने खड़ा कर दिया जाए तो...?
वैज्ञानिकों को बधाई परन्तु हमारे पृथ्वी पर रहने वाले ऐसे लोगों को कैसे सांत्वना दूं जो पृथ्वी पर बिछे पत्थरों की दरारों में रोटी की आस लिए जमींदोज होते जा रहे हैं।
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