किताब तो आ गई। अब इस रोमांच या सुख में हस्तक्षेप की बात कहंा पर रह जाती है?
मैंने किताब के लेखकीय में जिन दो लोगों को धन्यवाद नहीं दिया वे हैं मेरी पत्नी निशा तथा मेरा बेटा भारत। मैंने इनके हिस्से का समय इस किताब को दिया। क्या यह उचित था? किताब के लिए शायद उचित होगा परन्तु इनके लिए? कदापि नहीं! उनके हिस्से के सुख से यह किताब लिखी गई और किताब में उनका जिक्र भी नहीं। मैं शर्मिन्दा हूं। कोई भी लेखक जब कोई कृति करता है, तो उसपर पहला हक उनका होता है, जिनके हिस्से के समय से वह कृति रची गई है। उनके ऋण से मुक्त होना बहुत मुश्किल है।

sahi kaha apne....
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