Saturday, December 25, 2010

भ्रष्टाचार और आम आदमी

जब कभी आपको किसी बात पर बहुत अधिक क्रोध आए और आप कुछ भी नहीं कर सकते हों तो आप क्या करना चाहेंगे? शायद आप भगवान से प्रार्थना करना चाहेंगे अथवा अपने बाल नोचना चाहेंगें? यह इसपर भी निर्भर करता है कि आपको मजबूर करने वाला किस तरह का व्यक्ति है? यदि वह व्यक्ति हद दर्जे का कमीना हो, स्वार्थी हो आपका पैसा हड़प करने वाला हो और इसके बावजूद भी स्वयं को आपका हितैषी कहे तो आप उसके साथ क्या करना चाहेंगे? ...मैं अन्दाजा लगा सकता हूं आप उसके साथ क्या करना चाहेंगे। अब जरा यह सोचिए कि ए.राजा ने, जिसने 2जी स्पैक्ट्रम घोटाले में देश के करदाताओं का सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए एक लाख पिचहत्तर हजार करोड़ रूपया यानि 17 खरब 50 अरब रूपया खा लिया हो और स्वयं को देशप्रेमी कहे तो आप उसके साथ क्या-क्या करना चाहेंगें?
भ्रष्टाचार पर वैसे तो बहुत बार दुखी हुआ हूं मैं, पर पहली बार मेरा मन किया कि मैं पागल होकर चिल्लाता हुआ प्रधानमंत्री के आगे आत्मदाह कर हूं। इसके बाद भी यदि क्रोध खतम न हुआ तो देश की हालत पर शर्मिंदा होकर बार-बार मरना चाहूंगां। परन्तु पता है कि इससे भी हमारे प्रधानमंत्री और ए.राजा जैसे नराधम को शर्म नहीं आएगी।
पर मेरे पास तो और कुछ नहीं करने को....।
आप बताएं है कुछ करने को मेरे पास? यदि हां तो मैं शांत क्यों हूं? आप शांत क्यों हैं?

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