Saturday, June 4, 2011

मुकेश अम्बानी और मैं



मुकेश अम्बानी के साथ मेरी तुलना किसी को भी अजीब लगेगी। परन्तु एक दिन बस में बैठे-बैठे मैंने विचार किया और स्वतः ही उनसे अपनी तुलना करने लगा। तुलना के दौरान जो बातें सामने आईं, उसने मुझे संतोष दिया। मुझे पता चला कि मैं मुकेश अम्बानी से कहीं अधिक खुशनसीब व्यक्ति हूं।
कैसे...? इसके पहले मैं बता दूं कि सुखी होना और खुश होने में फर्क होता है। निश्चित ही मुकेश अम्बानी मेरे से अधिक सुखी इन्सान हैं, परन्तु क्या मुझसे अधिक खुश व्यक्ति भी हैं? क्या मुझसे अधिक खुशनसीब भी हैं? नहीं... एक बात सोच कर देखिए। हम दोनों में से किसके पास खुश होने के अवसर अधिक हैं? मुकेश किस अवसर पर खुश होते होंगे? वह खुशी जो क्षणिक भले ही हो, परन्तु वास्तविक हो। हमें सोचना पड़ेगा कि मुकेश अम्बानी कब-कब खुश हो सकते होंगे। महंगा हवाई जहाज खरीद कर भी वह खुश तो नहीं होते होंगे। हां, यदि अपने किसी रिश्तेदार को वह हवाई जहाज भेंट करें और वह खुश हो जाए, तो उसकी खुशी से वह अवश्य खुश हो जाएंगे। यानि खुशी हवाई जहाज से नहीं, अपने किसी अजीज की खुशी से आती है। उनके अजीज भी कब-कब खुश होते होंगे? किसी मकान को खरीदने से, किसी कार को खरीदने से या किसी अन्य ऐसी ही चीज से? नहीं...यह सब उनके लिए अतिसामान्य बातें हैं। इनसे वह खुश तो नहीं होते होंगे। यह उनके लिए दिनचर्या समान है। हमें बहुत सोचना पड़ता होगा कि वह कब-कब खुश होते होंगे। परन्तु जरा आप मेरे बारे में सोच कर देखें। मैं मध्यम आयवर्ग का सामान्य सा सरकारी नौकर हूं। मैं बहुत से अवसरों पर खुश होता हूं और हो सकता हूं। मेरी बस छुट गई और किसी जानकार ने लिफ्ट दे दी...मैं खुश। कोई पुराना साथी अचानक मिल गया...मैं खुश। मेरी पसन्द की केाई किताब मुझे किसी ने दे दी...मैं खुश। मेरे बच्चे के अच्छे नम्बर गए...मैं खुश। मेरी कविता की किसी ने प्रसंशा कर दी...मैं बहुुत खुश। यहां तक कि मेरे पसन्द की सब्जी बन गई तो भी मैं खुश। गिनती करें तो करते रह जाएंगे...इतने मौके हैं मेरी खुशी के। मेरे पास खुश रहने के हजारों अवसर हैं और मुकेश अम्बानी के पास...? निश्चित ही इतने नहीं हैं। तो कौन है खुशनसीब। उनके पास सुख के सब साधन हैं परन्तु खुश रहने के साधन नहीं। खुश रहने का साधन होता है हमारे भावों में आया प्रसन्नता का आवेग। जो कि मुकेश के पास कम ही आता होगा।
...तो बताईये...कौन है अधिक खुश...अधिक खुशनसीब? मैं ...

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